स्मृतियां!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि सुश्री ममता किरण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री ममता किरण जी की यह कविता –

मेरी माँ की स्मृतियों में कैद है
आँगन और छत वाला घर
आँगन में पली गाय
गाय का चारा सानी करती दादी
पूरे आसमान तले छत पर
साथ सोता पूरा परिवार
चाँद तारों की बातें
पड़ोस का मोहन
बादलों का उमड़ना-घुमड़ना
दरवाजे पर बाबा का बैठना।

जबकि मेरी स्मृतियों में
दो कमरों का सींखचों वाला घर
न आँगन न छत
न चाँद न तारे
न दादी न बाबा
न आस न पड़ोस
हर समय कैद
और हाँ…
वो क्रेच वाली आंटी
जो हम बच्चों को अक्सर डपटती।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “स्मृतियां!”

  1. बहुत ही मार्मिक और सुंदर रचना। दो पीढ़ियों की बदलती ‘स्मृतियों’ का यह चित्रण दिल को छू गया। बेहतरीन साझा, धन्यवाद!

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  2. 🙏🏻 नमस्कार 🙏🏻

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