आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मंगलेश डबराल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।
इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मंगलेष डबराल जी की यह कविता –

किसी दिन हम दीवाल पर पीठ टिका देंगे
हम जो बैठे हैं
रोशनी में कविता बाँचते हुए
किसी दिन हमारे कपड़े नदी में तैरते दिखेंगे
चिट्ठियों पर धूल जम जायेगी
कमरे में साँप भरे होंगे किसी दिन
किसी दिन जीभ का स्वाद मिट जायेगा
हाथ की लकीरें ग़ायब हो जायेंगी
रातों-रात क़िताबें खो जायेंगी
चश्मा टूट जायेगा तड़ाक-से
किसी दिन सिर्फ़ दीवाल होगी
जिस पर हम
टिकायेंगे पीठ ।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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