जीने का हुनर भी देना!

ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना,
पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना|

मेराज फ़ैज़ाबादी

2 responses to “जीने का हुनर भी देना!”

  1. क्या बात है! बहुत ही खूबसूरत और गहरा शेर। पढ़कर दिल को सुकून मिला।

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    1. हार्दिक आभार जी

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