हर ओर कलियुग के चरण!

सभी को पुनीत पर्व होली की हार्दिक शुभ कामनाएं।

आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

भारत भूषण जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण जी का यह गीत–

हर ओर कलियुग के चरण
मन स्मरणकर अशरण शरण।

धरती रंभाती गाय सी
अन्तोन्मुखी की हाय सी
संवेदना असहाय सी
आतंकमय वातावरण।

प्रत्येक क्षण विष दंश है
हर दिवस अधिक नृशंस है
व्याकुल परम् मनु वंश है
जीवन हुआ जाता मरण।

सब धर्म गंधक हो गये
सब लक्ष्य तन तक हो गये
सद्भाव बन्धक हो गये
असमाप्त तम का अवतरण।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                            ********  

2 responses to “हर ओर कलियुग के चरण!”

  1. सुंदर रचना।

    Liked by 1 person

  2. हार्दिक धन्यवाद जी

    Like

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply