आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार श्री सोम ठाकुर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।
सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी की यह मधुर गीत–

ये प्याला प्रेम का प्याला है,
तू नाच के और नचाकर पी
खुल-खेल के पी, झुक झूम के पी
मत गैर से नज़र बचाकर पी,
ये प्याला प्रेम का प्याला है।
इसके रस में है अमृत रस,
इसकी खुशबू में चंदन है,
इसका खुमार है कस्तूरी,
रंगत केसर की ढलकन है,
जो मन से करे आचमन तो,
बेगानापन अपनापन है,
द्वारे द्वारे मधुवन मधुवन
आंगन आंगन वृन्दावन है।
वंशी के हर दीवाने को,
हम आए हैं समझाने को,
शरमाकर पी मत कभी इसे
तू गाकर रास रचाकर पी,
ये प्याला प्रेम का प्याला है।
हर दिल है इसकी मधुशाला
इसकी दूरी क्या दूरी है,
बेमौल मिले इसकी कीमत
दिलबर की हुकुम हुजूरी है।
ये चढकर कभी नहीं उतरे
पूरी पूरी मजबूरी है
पी ले तो मन का मैल कटे
ये ऐसी ही अंगूरी है।
तू जी में कोई घुटन न ला,
माथे पर कोई शिकन न ला,
रुकने का नाम न ले प्यारे
पी ले तो और पचाकर पी,
ये प्याला प्रेम का प्याला है।
जीते जी तरना चाहे तो
पी ले तीरथ जल के बदले
जो प्यार का सच्चा तार मिले,
बंध जा तू सांकल के बदले,
सीपी का प्यार मिल गया तो
दुर्दिन भी बादल के बदले,
मीरा ने टेरे श्याम पिया
तो अर्थ हलाहल के बदले।
ये प्याला रूप हजारा है,
जल से उछला अंगारा है,
तू इसकी ताप तरंगों में
मन को कुछ तचा-रचाकर पी,
ये प्याला प्रेम का प्याला है।
पीने के ढंग हजारों हैं
चाहे जिस चाल-चलन से पी,
गैरों से मेल-मिलाप से पी,
मनमोहन से अनबन से पी,
जैसे भी हाथ लगे पी ले,
होठों से पी, चितवन से पी,
क्या काम अधूरे मन का है,
हर घूंट को पूरे मन से पी।
घट-घट में इसकी प्यास जगी
घूंघट में इसकी आस जगी
मरघट में पी खामोशी से
पनघट पर शोर मचाकर पी,
ये प्याला प्रेम का प्याला है
तू नाच के और नचाकर पी,
खुल-खेल के पी, झुक झूम के पी
मत गैर से नज़र बचाकर पी,
ये प्याला प्रेम का प्याला है।
श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत मुझे अत्यंत प्रिय है और इसको मैं अपने यूट्यूब चैनल पर भी अपने स्वर में अपलोड कर रहा हूँ। अपने यूट्यूब चैनल पर मैं लोकप्रिय गीतों, भजनों आदि के अलावा श्रेष्ठ कवियों की रचनाएं भी अपलोड करता हूँ, मेरे यूट्यूब चैनल का पता है –
youtube.com/@kris230450
आज के लिए इतना ही,
धन्यवाद ।
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