अपने तमाशाइयों में हूँ!

ख़ुद ही मिसाल-ए-लाला-ए-सेहरा लहू लहू,
और ख़ुद ‘फ़राज़’ अपने तमाशाइयों में हूँ|

अहमद फ़राज़

2 responses to “अपने तमाशाइयों में हूँ!”

  1. यह वाक्यांश व्यक्त करता है कि कवि स्वयं को जुनून और बलिदान का जीता-जागता उदाहरण मानता है, और अपने दर्शकों के सामने अपनी तीव्रता का प्रदर्शन करता है।

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    1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ।

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