आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और नवगीत विधा के स्वर्णिम हस्ताक्षरों में से एक स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।
माहेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत–

आज गीत
गाने का मन है
अपने को
पाने का मन है
अपनी छाया है
फूलों में
जीना चाह रहा
शूलों में
मौसम पर
छाने का मन है
नदी झील
झरनों सा बहना
चाह रहा
कुछ पल यों रहना
चिड़िया हो
जाने का मन है
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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