ऐ काश तुम भी!

रक़्स-ए-सबा के जश्न में हम तुम भी नाचते,
ऐ काश तुम भी आ गए होते सबा के साथ|

कैफ़ी आज़मी

2 responses to “ऐ काश तुम भी!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक आभार जी

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