आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।
माचवे जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की यह कविता–

पहले उस ने पाले कुछ पिल्ले
बडे हुए, भाग गये;
पाली कुछ बिल्लियाँ, वे
दोस्तों को दे दी ।
फिर पाली कुछ लाल मछलियाँ,
वे मर गयीं;
पाला एक तोता, जो उड गया ।
जोडे का एक बचा
उठा गयी मित्र की बिडाली उसे
पालने की यह आदत
कम न हुई ।
सुना है कि आजकल, रखें हैं कुछ आदमी
पालतू,
फ़ालतू !
होगा क्या उनका ?
(मार देंगे पडोसी के बडे बम ?
फिर भी नहीं होंगे कम) ।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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