मंज़िल पे न पहुँचे उसे

मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते,
दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते|

नवाज़ देवबंदी

2 responses to “मंज़िल पे न पहुँचे उसे”

  1. वाह वाह।

    Liked by 3 people

    1. हार्दिक आभार जी

      Liked by 2 people

Leave a comment