मौत ने कहा!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।

कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी का यह नवगीत –

फ़ोन की घण्टी बजी
मैंने कहा — मैं नहीं हूँ
और करवट बदल कर सो गया।

दरवाज़े की घण्टी बजी
मैंने कहा — मैं नहीं हूँ
और करवट बदल कर सो गया।

अलार्म की घण्टी बजी
मैंने कहा — मैं नहीं हूँ
और करवट बदल कर सो गया।


एक दिन
मौत की घण्टी बजी…
हड़बड़ा कर उठ बैठा —
मैं हूँ… मैं हूँ… मैं हूँ..

मौत ने कहा —
करवट बदल कर सो जाओ।


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “मौत ने कहा!”

  1. बहुत सुंदर ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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