अभिमत बदलते हैं!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि इसाक अश्क जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।

इसाक जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है इसाक अश्क जी का यह नवगीत –


रंग
गिरगिट की तरह
अभिमत बदलते हैं ।

रोज़
करते हैं तरफ़दारी
अंधेरों की
रोशनी को
लूटने वाले
लुटेरों की

इसमें
नहीं होते सफल तो
हाथ मलते हैं ।

अवसरों की
हुण्डियाँ बढ़कर
भुनाने की
जानते हैं हम
कला झुकने
झुकाने की

यश
मिले इसके लिए हर
चाल चलते हैं।


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “अभिमत बदलते हैं!”

  1. इस गहन और गहन चिंतन को साझा करने के लिए धन्यवाद। आपकी कविताएँ आपकी भावनाओं की आलोचनात्मक शक्ति और ईमानदारी को स्पष्ट रूप से प्रकट करती हैं। पढ़कर आनंद आया।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी, मैं यहाँ अपनी कविताएं भी शेयर करता हूँ और अन्य प्रसिद्ध कवियों की भी, यह इसाक अश्क जी की कविता है।

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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