श्रीराम स्तुति

प्रभु श्रीराम की स्तुति में कुछ पंक्तियां बहुत पहले लिखी थीं, अभी तक जैसी याद रहीं, प्रस्तुत हैं-

चिंतन, शील, दया-करुणा

जो हर ले भव-बाधा,

जीवन का आदर्श

राम तेरी यह मर्यादा।

दीनबंधु तुम ही

भव सागर तारणहारे हो,

हो अशरण की शरण

निबल के सबल सहारे हो।

तुम बिन जीवन की घाटी में

केवल अंधियारा,

कृपा सिंधु है नाम तुम्हारा

सुमिरन उजियारा।

तुमसे विमुख रहे जो

उस प्राणी का जीना क्या

सृष्टि रूप तुम

बिना तुम्हारे

वर्ष-महीना क्या।

मैं अबोध संतान तुम्हारी

मुझको यह वर दो

निश्छल जीवन रहे

अनीति कोई न कहीं पर हो।

शक्ति मुझे दो

निर्भय होकर

युग का सत्य कहूं,

हो हनुमत सी विनय

सदा भक्तों का

भक्त रहूं।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार ।

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2 responses to “श्रीराम स्तुति”

  1. 🌼🙏🏻🌺 जय श्री राम 🌼🙏🏻🌺

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    1. जय श्रीराम

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