पैरहन घटाओं के!

तुम ने सिर्फ़ चाहा है हम ने छू के देखे हैं,
पैरहन घटाओं के जिस्म बर्क़-पारों के|

साहिर लुधियानवी

2 responses to “पैरहन घटाओं के!”

  1. बहुत खूब 👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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