ख़्वाब राएगाँ निकले!

हक़ीक़तें हैं सलामत तो ख़्वाब बहुतेरे,
मलाल क्यूँ हो कि कुछ ख़्वाब राएगाँ निकले|

साहिर लुधियानवी

2 responses to “ख़्वाब राएगाँ निकले!”

  1. बेहतरीन 👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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