
समय को कौन रोक सकता है जी! दिन, माह, वर्ष बदलते ही जाते हैं, 2024 को भी जाना था, चला गया है।
किसी कवि की काव्य पंक्ति पहले भी मैंने दोहराई हैं –
आने वाले स्वागत, जाने वाले विदा
अगले चौराहे पर इंतज़ार, शुक्रिया।
बहुत से लोग यही शिकायत करते रहते हैं कि दिन, माह, वर्ष बदलते जाते हैं, लेकिन समय नहीं बदलता, किस्मत नहीं बदलती।
मेरी यही कामना है कि आप सभी के लिए नया वर्ष 2025 सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि से परिपूर्ण हो।
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