बुतों ने की हैं जहाँ में!

हम ऐसे सादा-दिलों की नियाज़-मंदी से,
बुतों ने की हैं जहाँ में ख़ुदाइयाँ क्या क्या|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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