मेरी कुछ और रचनाएं-4

एक बार फिर से कुछ पुरानी रचनाएं मिल गईं सोचा इनको भी ढोल पीट लेता हूँ, क्योंकि बहुत समय पहले 1980 में दिल्ली छोड़ दी थी और रचनाकर्म भी लगभग छूट ही गया था| अधिकतर सुदूर प्रोजेक्ट्स में रहा और अब 7 से अधिक वर्षों से गोवा में रह रहा हूँ, जहां साहित्यिक सपोर्ट और ईको सिस्टम दूर-दूर तक नहीं है, कम से कम मेरा यहाँ कोई साहित्यिक संपर्क नहीं है|

जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका प्रकाशन/ प्रसारण भी हमेशा इसी नाम से हुआ, लेकिन बाद में  जबकि मालूम हुआ कि इस नाम से कविताएं आदि लिखने वाले कम से कम दो और रचनाकार रहे हैं, इसलिए अब मैं अपनी कविताओं को पहली बार श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ नाम से प्रकाशित कर रहा हूँ, जिससे एक अलग पहचान बनी रहे।


इस बीच कुछ और अधूरी सी रचनाएं पुराने कागजों में दिखाई पड़ गईं तो उनको भी धूप दिखा देता हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत हैं दो छोटी रचनाएं –

1`.

बात यह अनर्गल है,

अस्फुट संवाद है

किन्तु आज के युग में

यही निर्विवाद है|

बोया ईमान तो,

फसल होगी भूख की|

भूल सको तो भूलो,

बाकी जो याद है|

****

अपने आसपास होना

अधिक दुष्कर है

इसीलिए मैं अक्सर

बैरुत में होता हूँ

या वियतनाम में!

दूर बहुत दूर से

अखबारों की स्याही में पहुंचाया गया

बम का धमाका –

आदमी को गंभीर बनाता है

और गंभीर होना

अपने परिवेश से बाहर होना है|

इसी तरह मैं

अपनी चटखती नसों से

असंपृक्त हो पाता हूँ|

आज के लिए इतना ही, कल अपनी कोई और रचना शेयर करने का प्रयास करूंगा|

नमस्कार

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2 responses to “मेरी कुछ और रचनाएं-4”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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