यूँ ही मुस्कुराए ज!

उठाए जा उन के सितम और जिए जा,
यूँ ही मुस्कुराए जा आँसू पिए जा|

मजरूह सुल्तानपुरी

One response to “यूँ ही मुस्कुराए ज!”

  1. वाह वाह।

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