पलटना चाहें वहाँ से!

न जा कि इस से परे दश्त-ए-मर्ग हो शायद,
पलटना चाहें वहाँ से तो रास्ता ही न हो|

मुनीर नियाज़ी

2 responses to “पलटना चाहें वहाँ से!”

  1. वाह क्या बात

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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