आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|
इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आपकी रचनाएं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तारसप्तक’ में भी सम्मिलित की गई थीं|
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की यह कविता –

किसने बनाए
वर्णमाला के अक्षर
ये काले-काले अक्षर
भूरे-भूरे अक्षर
किसने बनाए
खड़िया ने
चिड़िया के पंख ने
दीमकों ने
ब्लैकबोर्ड ने
किसने
आख़िर किसने बनाए
वर्णमाला के अक्षर
‘मैंने…मैंने’-
सारे हस्ताक्षरों को
अँगूठा दिखातेहुए
धीरे से बोला
एक अँगूठे का निशान
और एक सोख़्ते में
ग़ायब हो गया
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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