जो उस पे बूँद गिरी!

जो उस पे बूँद गिरी अब्र कपकपा उट्ठा,
इस एक लम्हे में काफ़ी घरों पे बिजली गिरी|

शहज़ाद क़ैस

2 responses to “जो उस पे बूँद गिरी!”

  1. बहुत खूब

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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