दिल सी चीज़ के गाहक होंगे दो या एक हज़ार के बीच,
‘इंशा‘ जी क्या माल लिए बैठे हो तुम बाज़ार के बीच|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
दिल सी चीज़ के गाहक होंगे दो या एक हज़ार के बीच,
‘इंशा‘ जी क्या माल लिए बैठे हो तुम बाज़ार के बीच|
इब्न-ए-इंशा
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