मदहोशी में एहसास के

मद-होशी में एहसास के ऊँचे ज़ीने से गिर जाने दे,

इस वक़्त न मुझ को थाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है|

क़तील शिफ़ाई

2 responses to “मदहोशी में एहसास के”

  1. वाह क्या बात है।👌👌👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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