ये आशियानों के जलने

हुई जो जश्न-ए-बहाराँ के नाम से मंसूब,

ये आशियानों के जलने की रौशनी तो नहीं|

कृष्ण बिहारी नूर

2 responses to “ये आशियानों के जलने”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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