यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमने!

आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि स्वर्गीय त्रिलोचन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

त्रिलोचन जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय त्रिलोचन जी की यह कविता –

यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमने
परिचय की वो गाँठ लगा दी !

था पथ पर मैं भूला-भूला
फूल उपेक्षित कोई फूला
जाने कौन लहर थी उस दिन
तुमने अपनी याद जगा दी ।


कभी कभी यूँ हो जाता है
गीत कहीं कोई गाता है
गूँज किसी उर में उठती है
तुमने वही धार उमगा दी ।

जड़ता है जीवन की पीड़ा
निस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ा
तुमने अन्जाने वह पीड़ा
छवि के शर से दूर भगा दी ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

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One response to “यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमने!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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