
मैंने ब्लॉग लेखन प्रारंभ किया था लगभग 7 वर्ष पहले| प्रारंभ में मैंने अपने जीवन, सेवाकाल, कविता की दुनिया, कवि मित्रों आदि के विषय में संस्मरण आदि लिखे, श्रेष्ठ कवियों की कविताएं, शायरी आदि को तो मैं शेयर करता ही रहता हूँ, जब कहीं जाने का अवसर मिलता है तो यात्रा संबंधी अनुभव भी शेयर करता हूँ|
आज मुझे श्रेष्ठ गीत-कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी का स्मरण आ रहा है, किशन जी ने बहुत गहन संवेदना से युक्त गीत लिखे थे और वे कहते थे कि उन्होंने कुछ नहीं लिखा, बोलते थे कि ‘मैंने तो बस प्रेम किया, मुझे यही आता था और परिणामस्वरूप ये सब सामने आ गया, जिन्हें मैं अपने गीत कहता हूँ|
वास्तव में अधिकांश कविताएं, गीत ग़ज़ल आदि अत्यधिक गहन प्रेम अथवा प्रेम के अभाव, दोनों के आधार पर ही लिखे जाते हैं, कभी कवि प्रेम करके कविता का धनी हो जाता है और कभी प्रेम के अभाव में भी!
मुझे स्वर्गीय किशन सरोज जी के ही एक प्रसिद्ध गीत ‘चंदन वन डूब गया’ की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं-
माना सहमी गलियों में न रहा जाएगा
सांसों का भारीपन भी न सहा जाएगा
किन्तु विवशता यह यदि अपनों की बात चली
कांपेंगे अधर और कुछ न कहा जाएगा।
वह देखो! मंदिर वाले वट के पेड़ तले
जाने किन हाथों से दो मंगल दीप जले
और हमारे आगे अंधियारे सागर में
अपने ही मन जैसा नील गगन डूब गया।
अपने सेवाकाल में कवि सम्मेलनों, सांस्कृतिक आयोजनों आदि के अनुभव को जब याद करता हूँ, एक तरफ श्रेष्ठ कवियों-कलाकारों आदि से भरपूर प्रेम मिलता था, दूसरी तरफ कर्मचारी साथियों और कॉलोनी वासियों, से जो प्रेम मिलता था, उनको लगता था कि श्रोता के रूप उनकी इस प्रकार की सांस्कृतिक प्यास बुझाने वाला पता नहीं भविष्य में कोई आएगा या नहीं| सेवा-निवृत्ति के बाद जबकि मैं इन सब गतिविधियों से, सुधी श्रोता समुदाय से दूर हो गया हूँ, वह अनन्य प्रेम बहुत याद आता है, जहां अक्सर लोग मुझे प्रेम से घेर लेते थे|
खैर किशन सरोज जी के एक और गीत की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं, ये पंक्तियाँ भी प्रेम के लिए भटकने को लेकर हैं| दुनिया में सब तरह के लोग हैं लेकिन कोई स्वयं अपने बारे में यह नहीं मानता कि वह यहाँ प्रेम करने के लिए नहीं आया है, लेकिन ऐसे लोग भी होते तो हैं|
पर्वतों-पर्वतों, घाटियों-घाटियों
बस्तियों-बस्तियों, रास्तों-रास्तों,
हम भटकते फिरे बादलों की तरह,
जब हमारे लिए तुम गगन हो गए|
आज ऐसे ही कुछ अस्फुट विचार मन में आए, सोचा कि इनको ही आपके साथ शेयर कर लेता हूँ|
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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