उसे भूल जाऊँ मैं!

यारो कहाँ तक और मोहब्बत निभाऊँ मैं,

दो मुझ को बद-दुआ‘ कि उसे भूल जाऊँ मैं|

क़तील शिफ़ाई

2 responses to “उसे भूल जाऊँ मैं!”

  1. वाह क्या बात

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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