इश्क़ की इब्तिदा है ख़ामोशी!  

आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और ग़ज़ल लेखक श्री सूर्यभानु गुप्त  जी  की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ|

इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत हैं श्री सूर्यभानु गुप्त जी की यह ग़ज़ल –

इश्क़ की इब्तिदा है ख़ामोशी
आहटों का पता है ख़ामोशी

चाँदनी है, घटा है ख़ामोशी
भीगने का मज़ा है ख़ामोशी

काम आती नहीं कोई छतरी
बारिशों की हवा है ख़ामोशी

इस के क़ाइल हैं आज भी पत्थर
सौ नशे का नशा है ख़ामोशी

कंघियाँ टूटती हैं लफ़्ज़ों की
जोगियों की जटा है ख़ामोशी

इश्क़ की कुण्डली में छुरियाँ हैं
हर छुरी पर लिखा है ख़ामोशी

एक आवाज़ बन गयी चेहरा
कान का आईना है ख़ामोशी

नैन भूले पलक झपकना भी
सोच का केमेरा है ख़ामोशी

भीगती रात की हथेली पर
जैसे रंगे-हिना है ख़ामोशी

पेड़ जिस दिन से बे-लिबास हुये
बर्फ़ का क़हक़हा है ख़ामोशी

घर की एक-एक ईंट रोती है
बेटियों की विदा है ख़ामोशी

रूह तो दी बदन नहीं बख़्शा
किस ख़ता की सज़ा है ख़ामोशी

घर में दुख झेलती हर इक माँ की
आतमा की दुआ है ख़ामोशी

गुफ़्तेगु के सिरे हैं हम दौनों
बीच का फ़ासला है ख़ामोशी

दे गई हर ज़ुबान इस्तीफ़ा
इस क़दर लब-कुशा है ख़ामोशी

बस्तियों की हरिक अदालत में
इक रुका फ़ैसला है ख़ामोशी

रात-दिन भीड़-भाड़, हंगामे
इस सदी की दवा है ख़ामोशी

लफ़्ज़ मत फेंक ग़म के दरिया में
सब से ऊँची दुआ है ख़ामोशी

देवता सब नशे के आदी हैं
और उन का नशा है ख़ामोशी

ख़ुद से लड़ने का हौसला हो अगर
जंग का तज़्रिबा है ख़ामोशी

दोसतो! ख़ुद तलक पहुँचने का
मुख़्तसर रासता है ख़ामोशी

हम तो क़ातिल हैं अपने ख़ुद साहिब
तीन सौ दो दफ़ा है ख़ामोशी

हर मुसाफ़िर का बस ख़ुदा-हाफ़िज़
डाकुओं का ज़िला है ख़ामोशी

ढूँढ ली जिस ने अपनी कस्तूरी
उस हिरण की दिशा है ख़ामोशी

लोग तस्वीर बन गये मर कर
ज़िन्दगी का सिला है ख़ामोशी

कितनी ही बार हम गये-आये
हर जनम की कथा है ख़ामोशी

कैफ़ियत है बयान के बाहर
क्या बताएँ कि क्या है ख़ामोशी

थक के लौट आईं सारी भाषाएँ
लापतों का पता है ख़ामोशी

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                                   ********   

6 responses to “इश्क़ की इब्तिदा है ख़ामोशी!  ”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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  2. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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  3. बहुत खूब

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    1. धन्यवाद जी

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