एक चिड़िया आई!  

आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री अनूप अशेष जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी की यह कविता –

 जिस दिन मेरे घर
एक चिड़िया
आई पंख फुलाए।

मैंने देखा वह दिन
मेरे मन का था।
भूल गई थीं
सभी झंझटें
लिखी गई थी सिर्फ़ राग-मय
मीठी-मीठी घर-गाथा।

मुझे लगा यह दिवस
सुरों में
मुझको गाए।

हर कश्मीरी-क्षण मुझमें
जो डरा-डरा था।
अपने पंखों
लाल गुलों का बाग खिलाए
अब तक जो मेरी आँखों में
नुचा-मरा था।

मेरा आज
तुम्हारे कल की
भोर जगाए।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                                   ********   

3 responses to “एक चिड़िया आई!  ”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. नमस्कार जी

      Like

  2. Stories Analyse avatar
    Stories Analyse

    बहुत अच्छा “मेरा आज….
    !
    तुम्हारे कल की
    भोर जगाए।

    Liked by 1 person

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply