नयनों की रेशम डोरी से!

आज एक बार फिर मैं एक प्रमुख राष्ट्रीय कवि तथा भारत के स्वाधीनता संग्राम और गांधी जी के विषय में अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

द्विवेदी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की यह कविता –

नयनों की रेशम डोरी से
अपनी कोमल बरजोरी से।

रहने दो इसको निर्जन में
बांधो मत मधुमय बन्धन में,
एकाकी ही है भला यहाँ,
निठुराई की झकझोरी से।

अन्तरतम तक तुम भेद रहे,
प्राणों के कण कण छेद रहे।
मत अपने मन में कसो मुझे
इस ममता की गँठजोरी से।

निष्ठुर न बनो मेरे चंचल
रहने दो कोरा ही अंचल,
मत अरूण करो हे तरूण किरण।
अपनी करूणा की रोरी से।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                                   ********   

2 responses to “नयनों की रेशम डोरी से!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. नमस्कार जी

      Like

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply