किस का चमकता चेहरा लाएँ किस सूरज से माँगें धूप,
घूर अँधेरा छा जाता है ख़ल्वत-ए-दिल में शाम हुए|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
किस का चमकता चेहरा लाएँ किस सूरज से माँगें धूप,
घूर अँधेरा छा जाता है ख़ल्वत-ए-दिल में शाम हुए|
इब्न-ए-इंशा
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