जब भी उस के पाँव!

और भी सीना कसने लगता और कमर बल खा जाती,

जब भी उस के पाँव फिसलने लगते थे ढलवानों पर|

जाँ निसार अख़्तर

One response to “जब भी उस के पाँव!”

  1. जब भी मेरे पैर फिसलते हैं
    तब मुझे पता चलता है कि मैं पर्याप्त सावधान नहीं हूं।

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