खो गए उजालों में!

मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे,

रात के मुसाफ़िर थे खो गए उजालों में|

बशीर बद्र

One response to “खो गए उजालों में!”

  1. तुम्हारी आँखों में तारे
    रात के आसमान के नीचे
    सपने का
    अवशेष
    निहित होना
    हम वहां फिर मिलेंगे

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