अब कारगह-ए-दहर* में लगता है बहुत दिल,
ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है|
Prison of The World
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
अब कारगह-ए-दहर* में लगता है बहुत दिल,
ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है|
Prison of The World
मजरूह सुल्तानपुरी
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