गुमनाम हुए!

लोग हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर पल में माह-ए-तमाम हुए,

हम हर बुर्ज में घटते घटते सुब्ह तलक गुमनाम हुए|

इब्न-ए-इंशा

One response to “गुमनाम हुए!”

  1. ईश्वर के लिए हर प्राणी मोती है।

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