तेज़ था ठहरा कैसे!

रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे,

ग़म का तूफ़ाँ तो बहुत तेज़ था ठहरा कैसे|

              कृष्ण बिहारी नूर

One response to “तेज़ था ठहरा कैसे!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    🤍

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