मैंने अपने गानों को जन्म दिया! 

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के श्रेष्ठ व्यंग्यकार और कवि स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ|

त्यागी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता –

मैंने अपने गानों को जन्म दिया
एकदम चुपचाप-अकेले,
पर फिर भी एक दिन
उन सबके कण्ठ खुले,
और एक सुबह
– पंख उगे पक्षियों की तरह
वे रोके न रुके
उड़ निकले;
कुछ ने आशीर्वाद दिया
कुछ मुस्कराए;
और
मेरी आँखों से
ख़ुशी के – डर के
दो आँसू बह निकले।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

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2 responses to “मैंने अपने गानों को जन्म दिया! ”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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