ख़िज़ाँ कैसे कटेगी तेरी!

मैं न हूँगा तो ख़िज़ाँ कैसे कटेगी तेरी,

शोख़ पत्ते ने कहा शाख़ से मुरझाते हुए|

             गुलज़ार

Leave a comment