फ़ासला तो रहा!

मैं तेरी ज़ात में गुम हो सका न तू मुझ में,

बहुत क़रीब थे हम फिर भी फ़ासला तो रहा|

              जाँ निसार अख़्तर

3 responses to “फ़ासला तो रहा!”

  1. Beautiful words👏👏👏👏👏👏💯

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