हज़ार झोंपड़े गिरते हैं!

सदा जिए ये मिरा शहर-ए-बे-मिसाल जहाँ,

हज़ार झोंपड़े गिरते हैं इक महल के लिए|

             क़तील शिफ़ाई

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