सद्भावना गीत!

आज एक बार फिर मैं आज के लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक  श्री अशोक चक्रधर जी द्वारा लिखा गया सद्भावना गीत शेयर कर रहा हूँ|

चक्रधर जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी का यह गीत –

गूंजे गगन में,
महके पवन में
हर एक मन में
-सद्भावना।

मौसम की बाहें,
दिशा और राहें,
सब हमसे चाहें
-सद्भावना।

घर की हिफ़ाज़त
पड़ौसी की चाहत,
हरेक दिल को राहत,
-तभी तो मिले,

हटे सब अंधेरा,
ये कुहरा घनेरा,
समुज्जवल सवेरा
-तभी तो मिले,

जब हर हृदय में
पराजय-विजय में
सद्भाव लय में
-हो साधना।
गूंजे गगन में,
महके पवन में,
हर एक मन में
-सद्भावना।

समय की रवानी,
फतह की कहानी,
धरा स्वाभिमानी,
-जवानी से है।

गरिमा का पानी,
ये गौरव निशानी,
सूखी ज़िंदगानी,
-जवानी से है।

मधुर बोल बोले,
युवामन की हो ले,
मिलन द्वार खोले,
-संभावना।

गूंजे गगन में,
महके पवन में,
हर एक मन में
-सद्भावना।

हमें जिसने बख़्शा,
भविष्यत् का नक्शा,
समय को सुरक्षा
-उसी से मिली।

ज़रा कम न होती,
कभी जो न सोती,
दिये की ये जोती,
-उसी से मिली।

नफ़रत थमेगी,
मुहब्बत रमेगी,
ये धरती बनेगी,
-दिव्यांगना।

गूंजे गगन में,
महके पवन में,
हर एक मन में
-सद्भावना।

मौसम की बाहें,
दिशा और राहें,
सब हमसे चाहें,
-सद्भावना।

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                                      ********  

3 responses to “सद्भावना गीत!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    🩶

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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