कुछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा,
कुछ फ़ज़ा कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो|
फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
कुछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा,
कुछ फ़ज़ा कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो|
फ़िराक़ गोरखपुरी
🫂
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