हर कोई जग में!

तू भी हरे दरीचे वाली आ जा बर-सर-ए-बाम है चाँद,

हर कोई जग में ख़ुद सा ढूँडे तुझ बिन बसे आराम है चाँद|

इब्न-ए-इंशा

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