A sky full of cotton beads like clouds
हुस्न की दहशत अजब थी वस्ल की शब में ‘मुनीर,’
हाथ जैसे इंतिहा-ए-शौक़ से शल* हो गया|
*सुन्न
मुनीर नियाज़ी
Δ
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