रात के दश्त में फूल खिले हैं भूली-बिसरी यादों के,
ग़म की तेज़ शराब से उनके तीखे नक़्श मिटाते रहना|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds
रात के दश्त में फूल खिले हैं भूली-बिसरी यादों के,
ग़म की तेज़ शराब से उनके तीखे नक़्श मिटाते रहना|
मुनीर नियाज़ी
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