बढ़ता हुआ बच्चा!

आज एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

चक्रधर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज की कविता का विषय भी अलग किस्म का है|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता –

मैग्ज़ीन पढ़ रही है मां
बच्चा सो रहा है,
बच्चे के हाथ में भी
एक किताब है
पढे़ कैसे
वह तो सो रहा है।

हिचकियां ले रहा है
और बड़ा हो रहा है।

बढ़ता हुआ बच्चा
जब और और बढ़ेगा,
तो मां से भी ज़्यादा
किताबें पढ़ेगा।
मज़ा तो तब आएगा,
जब वो
किसी अनपढ़ मां को
पढ़ाएगा।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                                  ********  

3 responses to “बढ़ता हुआ बच्चा!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💛

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  2. नमस्कार 🙏

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    1. नमस्कार जी

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