रुख़ बदल बदल कर!

कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अ‘तन तग़ाफ़ुल,

मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर|

शकील बदायूनी

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    christinenovalarue

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