दिल लहू से भर गया!

सुब्ह-ए-काज़िब* की हवा में दर्द था कितना ‘मुनीर’,

रेल की सीटी बजी तो दिल लहू से भर गया|

*झूठा सवेरा

मुनीर नियाज़ी

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