मुफ़्त मिला है हुस्न!

‘इंशा’-जी उसे रोक के पूछें तुमको तो मुफ़्त मिला है हुस्न,

किस लिए फिर बाज़ार-ए-वफ़ा में तुमने ये जिंस गिराँ* की है|

*Made costly

इब्न-ए-इंशा

Leave a comment